जानिए सावन के महीने में सोमवार का विशेष महत्व और व्रत विधि..!!

सावन का महिना शुरू हो गया है और यह महिना भगवन शिव जी को अर्पित किया जाता है।  सावन माह के शुरू होने के साथ ही शिवालयों में अभिषेक और पूजा का दौर बहुत ही जोरों-शोरों से शुरू हो जाता है। यह महिना भगवान शिव को बहुत ही प्रिय है जिसमें वह अपने भक्तों पर असीम कृपा बरसाते हैं। इस महीने में खासकर सोमवार के दिन व्रत-उपवास, पूजा पाठ का विशेष लाभ होता है।

क्यों है सावन में शिवजी सोमवार और शिवलिंग का महत्त्व?

सावन के सोमवार का विशेष महत्व माना गया है। शिव की अराधना करने पर सभी बाधाएं खत्म हो जाती है इसीलिए इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना की जाती है।

सोमवार अंक 2 है और इस दिन का प्रतिरूप ग्रह चन्द्रमा है। चन्द्रमा मन का कारक है  और साथ ही साथ भगवान शिव जी  के मस्तक पर विराजमान है। । मन के नियंत्रण और शीतलता में चंद्रमा महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। इसका मतलब भगवान शिव स्वयं चंद्रमा को नियंत्रित करके, भक्त  के मन को चन्द्र के समान शांति और शीतलता प्रदान करके, एकाग्रित करते है।

क्यों है शिव जी को सावन मास प्रिय ?

सावन मास में सबसे जयादा वर्षा होती है जो शिव जी के शरीर को ठंडक प्रदान करती है। महादेव ने सावन मास की महिमा बताते हुए कहते है कि मेरे तीनों नेत्रों में सूर्य दाहिने, बांये चन्द्र और अग्नि मध्य नेत्र है। जब सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करता है, तब सावन महीने की शुरुआत होती है। गर्म होने के कारण सूर्य उष्मा देता है जबकि चंद्रमा शीतलता प्रदान करता है। इसलिए सूर्य के कर्क राशि में आने से बहुत अच्छी बारिश होती है।

व्रत के नियम –

  • प्रातः सुबह उठकर पानी में कुछ काले तिल डालकर नहाना चाहिए।
  • भगवान शिव का अभिषेक जल या गंगाजल से करना चाहिए। विशेष मनोकामनाओं के लिए दूध, दही, घी, शहद, चने की दाल, सरसों तेल, काले तिल, आदि कई सामग्रियों से अभिषेक की विधि प्रचिलत है।
  • दूध को चंद्र ग्रह से संबंधित माना गया है क्योंकि दोनों की प्रकृति शीतलता प्रदान करने वाली है। इसीलिए सावन में हर सोमवार महादेव पर दूध अर्पित करना चाहिए।
  • ऊँ नमः शिवाय मंत्र के मंत्र का जाप करना चाहिए और श्वेत फूल, सफेद चंदन, चावल, पंचामृत, सुपारी, फल और गंगाजल या साफ पानी से भगवान शिव और पार्वती की पूजा करें।
  • अभिषेक के साथ-साथ मंत्रों का जाप भी बेहद शुभ और लाभप्रद माना गया है। महामृत्युंजय मंत्र या फिर भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र का उच्चारण करना सर्वप्रथम होता है।
  • इसके बाद सावन के सोमवार की व्रत कथा करनी चाहिए।
  • पूजा करने के बाद भोग लगाएं और घर परिवार में प्रसाद बांटे।
  • दिन में केवल एक समय नमक रहित भोजन ग्रहण करें।
  • अगर पूरे दिन व्रत रखना सम्भव न हो तो सूर्यास्त तक भी व्रत कर सकते हैं।

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