संकष्टी चतुर्थी व्रत विधि :-

  • चतुर्थी के दिन व्रत के लिए सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए और साफ़ वस्त्र पहनने चाहिए।

  • अगर लाल रंग का वस्त्र पहनेंगे तो जयादा शुभ रहेगा।

  • इस दिन पूरे श्रधा भाव के साथ भगवन गणेश की पूजा करनी चाहिए. पूजा करते समय अपना मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।

  • इसके बाद फल, फूल, रौली, मौली, अक्षत, पंचामृत आदि से श्रीगणेश को स्नान कराके विधिवत तरीके से पूजा करें। गणेश जी को दूर्वा जरूर अर्पित करें..!

  • गणेश पूजन के दौरान धूप-दीप आदि से श्रीगणेश की आराधना करें।

  • श्री गणेश को तिल-गुड़ के लड्‍डू या मोदक का भोग लगाएं।

  • सायंकाल में संकष्टी गणेश चतुर्थी की कथा पढ़े और अपने बाकी परिजनों को भी सुनाएँ।

  • गणेशजी की आरती करें।

  • गणेश पूजा के बाद गणेश मंत्र 'ॐ गणेशाय नम:' अथवा 'ॐ गं गणपतये नम: की एक माला (यानी 108 बार गणेश मंत्र का) जाप अवश्य करें।

  • इसके पश्चात् चांद देखकर व्रत तोड़ें।

  • इस दिन चांद देखना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से व्यक्ति के सभी रोग दूर होते हैं। इस दिन भागवत का पाठ करना भी बहुत अच्छा होता है।

  • इस दिन गरीबों को दान अवश्य दे। आप लड्डू, फल, कंबल या कपडे़ आदि का दान कर सकते है।

  • इस व्रत को करने से सभी तरह के दुख दूर होते है, सभी सुखों की प्राप्ति होती है और समृद्धि बढती है।

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