शनि जयंती विशेष: शनि दिलाएंगे कष्टों से मुक्ति..!!

हिन्दू धर्मं में ज्येष्ठ मास की अमावस्या को शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन शनिदेव जो नौ ग्रहों में सातवें स्थान पर हैं, की पूजा करने से सारे प्रकोपों व दोषों से बचा जा सकता हैइस बार शनि जयंती 25 मई को मनाई जाएगी। उत्तर भारत में ज्येष्ठ अमावस्या को शनि जयंती के साथ-साथ वट सावित्री व्रत का पर्व भी मनाया जाता है। वहीँ दक्षिण भारत में बैसाख अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है।

कौन हैं शनि देव?

शनि, सूर्य देव व छाया (सवर्णा) के पुत्र हैं। इन्हें अपनी पत्नी के श्राप के कारण क्रूर ग्रह भी माना जाता है। परन्तु यह एक न्यायप्रिय देव हैं जो पाप-कर्म करने वालों को ही दंड देते हैं। वहीँ मेहनती व सच्चे लोगों को उनकी ईमानदारी का फल अवश्य देते हैं। शनि के अधिपत्य देवता प्रजापिता ब्रह्मा हैं और प्रत्यधिदेवता यम हैं। इनका वर्ण श्याम है और इनके नौ वाहन हैं जिनमे हंस, मोर, कौआ, सिंह, हाथी, घोड़ा, गधा, भैंसा और सियार की सवारी करते हैं तथा हाथ में सदा न्याय दंड रखते हैं। यह एक राशि में तीस महीने तक रहते हैं व मकर एवं कुम्भ राशि के स्वामी हैं। इनकी वक्र दृष्टि जिस पर पड़ जाये, उसकी राशि और ग्रहों का हिसाब-किताब ही बिगड़ जाता है, इसलिए ज्यादातर लोग इनकी कुदृष्टि से बचने के उपाय खोजते हैं। ऐसे में आप भी शनि दोष निवारण के कुछ अचूक उपाय अपनाकर कष्टों से बच सकते हैं जिनकी चर्चा आगे की गयी है।

क्या है शनि जयंती का महत्व?

शनि जयंती जिसे शनिचरी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है, यह शनिदेव का जन्म-दिवस होता है। इस दिन पूजा, हवन, दान पूरे समर्पण भाव से करें तो शनि अवश्य प्रसन्न होंगे। शनि की पूजा भी अन्य देवों की तरह सामान्य ही होती है। प्रातः काल स्नान आदि से निवृत होकर लकड़ी के पाटे पर काला कपड़ा बिछाकर शनि की प्रतिमा रखें। पंचामृत, इत्र, तेल आदि चढ़ाकर सिन्दूर, कुमकुम व काजल लगाकर काले या नीले फूल अर्पित करें।

इसके बाद फल व नैवेद्य का भोग लगायें, शनि पूजा और मूल शनि-मंत्र ‘ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:’ की एक माला का जप अवश्य करें। साथ ही पौराणिक शनि मंत्र ‘ऊँ ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्’ का जाप करने से शनि दोषों से राहत मिलती है। साथ ही शनि चालीसा का पाठ व अंत में शनिदेव की आरती करें तो शनिदेव सब कष्ट हरेंगे। श्री हनुमानजी या शिवजी की भी पूजा आराधना करें। साथ ही शनि मंदिर में तिल का तेल, काले उड़द, काले तिल, काला कपड़ा, काली मिर्च व प्रसाद चढ़ाने से शनि की कृपा-दृष्टि होती है। इस दिन काला कपड़ा, लोहे की वस्तु, सोना, नीलम आदि दान करना अति उत्तम होता है।  

महाराष्ट्र प्रांत में स्थित शनि शिंगणापुर मंदिर में शनि जयंती पर पाषाण की प्रतिमा पर तेल चढ़ाने व विशेष पूजा-अर्चना, हवन और प्रसाद अर्पण करने से सभी दुखों से मुक्ति मिलती है।

आईये जाने शनिदोष के कुछ अचूक उपाय

शनि ग्रह, शनि की ढ़ैय्या या साढ़ेसाती से डरने के बजाय कुछ आसन से अचूक उपाय अपनाकर आप शनि के संकट व दोषों से मुक्त हो सकते हैं जैसे कि :

  • अमावस्या को मंदिरों में सूर्योदय से पूर्व पीपल के वृक्ष को जल चढ़ाने व दिन में शनि महाराज की मूर्ति पर तैलाभिषेक तथा हवनात्मक ग्रह-शांति अनुष्ठान करने से पाप कर्मों से छुटकारा मिलता है।
  • एक कटोरी में तिल का तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देखकर इसे दान दें या शनि मंदिर में रख आयें। इससे शनिदेव प्रसन्न होंगे व शनि के अशुभ प्रभाव दूर होंगे।
  • शनि जयंती से पहले दिन सवापाव साबुत काले उड़द काले कपड़े में बांधकर रात को अपने पास रख कर सोयें। सोते समय बिस्तर पर आपके अलावा कोई और न होए। सुबह नहा-धोकर कर इसे किसी शनि मंदिर में रख आयें तो शनि की कुदृष्टि से आप बचे रहेंगे।
  • यदि आप शनि-दोष से पीड़ित हैं तो नीलम रत्न या लोहे का छल्ला धारण नहीं करें। अन्यथा शनि का कुप्रभाव और अधिक बढ़ जायेगा।
  • जिन लोगों की कुंडली शनि-दोष से पीड़ित है, उन्हें शनि के पैरों की तरफ ही देखना चाहिए, जहाँ तक हो सके शनि-दर्शन से बचना चाहिए।
  • प्रतिदिन भगवान भोलेनाथ पर काले तिल व दूध चढ़ाने से भी शनि से पीड़ित व्यक्ति के कष्ट दूर होते हैं।
  • शनि की शांति के लिए शनि शांति पूजा और शनि यज्ञ करवाएं।
  • पीपल के पेड़ को सींचने, दीपक जलाने से भी शनिदेव प्रसन्न होते हैं।

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