नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली की अद्भुत कहानी..! क्यों कहते है इसे नरक से मुक्ति पाने का पर्व..?

नरक चतुर्दशी, जिसे चौदस और छोटी दिवापाली के नाम से भी जाना जाता है, यह दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाती है हिंदी मान्यतायों के अनुसार इस दिन भगवान श्री कृष्णा ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था ऐसा माना जाता है की नरकासुर ने 16 हज़ार कन्याओं को बंदी बनाया हुआ था कृष्णा ने जब सभी कन्याओं को उसके अत्याचार से मुक्त करवाया तब सबने उनसे कहा की समाज में उन्हें कोई स्वीकार नहीं करेगा सबको समाज में सम्मान दिलवाने के लिए भगवान कृष्ण ने सबसे विवाह कर लिया

क्या है देशभर में प्रसिद्ध मान्यताएं:

  • एक मान्यता के अनुसार नरक चतुर्दशी के दिन सुबह स्नान करके यमराज की पूजा और संध्या के समय दीप दान करने से नर्क के यतनाओं से मुक्ति मिलती है और अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है।

  • इस दिन भक्ति पूजा करने से बाह्य व आंतरिक सुन्दरता व रूप का वरदान मिलता है इसलिए इस दिन को रूप चौदस के रूप में भी मनाया जाता है।

  • नरकासुर के मारे जाने की खुशी में लोगों ने दीवाली से एक दिन पहले ही घी के दीपक जलाकर छोटी दीवाली मनाई थी तब से आज तक रात को नरक चौदस छोटी दीवाली के रूप में मनाए जाने की परम्परा है।

  • इस दिन भी मां लक्ष्मी जी का गणेश जी सहित पूजन किया जाता है तथा उन्हें अपने घर आने की विनती की जाती है। रात को हनुमान जी का पूजन एवं श्री सुन्दर काण्ड का पाठ भी किया जाता है।


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