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बुद्ध पूर्णिमा का महत्व, मान्यताए और रोचक तथ्य..!

बुद्ध पूर्णिमा का महत्त्व

बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर सभी श्रधालु हर्षोउल्लास से भगवान बुद्ध का पूजन करते है और उनके द्वारा दी गई शिक्षाओं को याद करते है | यह पर्व महात्मा बुद्ध के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है अतः बौद्ध धर्मावलम्बियों के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण दिन है | इस दिन महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था और इसी दिन उन्हें ज्ञान और निर्वाह की प्राप्ति हुई थी | मान्यताओं के अनुसार, महात्मा बुद्ध विष्णु भगवान के नौवे अवतार माने जाते है, इस को दिन को हिन्दू धर्मावलम्बि भी पवित्र दिन की तरह मनाते हैं |

इस दिन विष्णु भगवान की पूजा-अर्चना की जाती है | श्रद्धालु महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं, उनके कार्यों एवं उनके व्यक्तित्व को याद करते हैं और उनके द्वारा बताये गये रास्ते पर चलने का संकल्प लेते है | बुद्ध पूर्णिमा के दिन पूजा-पाठ करने और दान देने का भी विशेष महत्व है | इस दिन सत्तू, मिष्ठान, जलपात्र, भोजन और वस्त्र दान करने और पितरों का तर्पण करने से पुण्य की प्राप्ति होती है |

बुद्ध पूर्णिमा के दिन स्नान का महत्त्व

बुद्ध पूर्णिमा के दिन स्नान का अत्यंत महत्व है | बुद्ध पूर्णिमा के शुभ अवसर पर हरिद्वार, वाराणसी, इलाहाबाद समेत कई जगहों पर देशभर से आए श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान करते हैं | इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना बहुत ही लाभदायक और पापनाशक माना जाता है और पूरे वर्ष पवित्र नदियों में स्नान करने का फल प्राप्त होता हैं | व्यक्ति के सभी पाप और अधर्म धुल जाते है | यदि पवित्र नदी में स्नान करना संभव न हो तो शुद्ध जल में गंगाजल को मिलाकर स्नान करना चाहिए |

विश्व में बुद्ध पूर्णिमा कैसे मनाई जाती हैं?

  • बौद्ध समुदाय – बौद्ध समुदाय के लोग अपने घरों में दीपक जलाते हैं और पूरे घर को फूलों से सजाते हैं | बहुत ही प्रेम भाव से महात्मा बुद्ध की पूजा-आराधना की जाती है |
  • बौद्ध गया – बौद्ध गया के पवित्र स्थल पर भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी | इस भव्य स्थल और बुद्ध की प्रतिमा तथा बौद्धिवृक्ष के दर्शन करने के लिए, लोग दूर-दूर से यहाँ पर आते हैं | इस दिन बौद्धिवृक्ष को फूलों से सजाया जाता हैं और इस वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं जाते हैं| इस वृक्ष की जड़ो में दूध और इत्र डाला जाता है और इसकी परिक्रमा की जाती हैं |
  • श्रीलंका – श्रीलंकावासी, इस दिन को वेसाक उत्सव के रूप में मनाते हैं | यहाँ यह पर्व दीपावली की तरह मनाया जाता है |
  • इस दिन पक्षियों को पिंजरे से मुक्त किया जाता है और गरीबों को दान में वस्त्र और भोजन कराया जाता हैं | हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, गरीबों को दान करने से गोदान के सामान फल प्राप्त होता है |
  • इस दिन दिल्ली संग्रहालय बुद्ध की अस्थियों को बाहर निकालता है और बौद्ध अनुयायी वहां आकर प्रार्थना करते हैं |
  • यह त्यौहार भारत, नेपाल, सिंगापुर, वियतनाम, थाइलैंड, कंबोडिया, मलेशिया, श्रीलंका, म्यांमार, इंडोनेशिया तथा पाकिस्तान में मनाया जाता है | भिन्न- भिन्न देशों के रीति और संस्कृति के अनुसार समारोह आयोजित किये जाते हैं |
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1 comment

  • Buddha Bhagwan adopted Ahimsa in his life. If we adopt it in our lives, we get everlasting peace.

    Dr Arun Kumar Agrawal

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