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गणेश चतुर्थी के दिन ना करें चन्द्र के दर्शन, लगेगा श्राप..! जानिए क्या है इससे जुड़ी रोमांचक कहानी..?

गणेश चतुर्थी के दिन चाँद का दर्शन अत्यंत हानिकारक माना गया है। इस दिन जो भी व्यक्ति जो भी मनुष्य चन्द्र के दर्शन करता है, उसे झूठ और चोरी जैसे आरोपों का सामना करता पड़ता है। अब ऐसा क्यों होता है, उसके पीछे एक बहुत ही रोमांचक कथा छिपी है।

यह कहानी है चन्द्र देव और भगवन गणेश जी की। एक बार गणेश जी को चंद्रलोक से भोजन का आमंत्रण आया। गणेश जी को शुरू से ही मोदक से अत्यंत प्रेम था इसीलिए उन्होंने वहां पर जमकर मोदकों का आनंद उठाया और वापिस लौटते समय अपने साथ बहुत सारे ले भी आए। मोदक बहुत ही सारे थे जिन्हें सँभालने के चक्कर में वह गिर गए। उनके साथ-साथ, सारे मोदक भी गिर गए। इस नज़ारे को देखकर चन्द्र देव को बहुत ही हंसी आई। उन्होंने गणेश जी का बहुत उपहास बनाया। चंद्रदेव को हस्ते हुए देखकर गणेश जी को बहुत क्रोध आया और उन्होंने कहा – “तुम्हारे जिस तेज़ और चमक पर तुम्हे इतना घमंड है, वही चमक तुम्हारे पास नहीं रहेगी और जो भी तुम्हे देखेगा उसे बहुत पछतावा होगा।”

इस श्राप से चन्द्र देव बहुत ही जयादा घबरा गए और उन्होंने गणेश जी से माफ़ी मांगकर अपने श्राप को वापिस लेने को कहा परन्तु अब यह श्राप गणेश जी पूरी तरह वापिस नहीं ले सकते थे।

यह घटना चतुर्थी के दिन हुई थी। इसीलिए सभी देवताओं और चन्द्र देव के बहुत आग्रह करने पर भगवान गणेश ने अपना यह श्राप चतुर्थी तक ही सीमित रखा और उन्हें कहा : "हे चन्द्र देव, आपकी रौशनी धीरे धीरे जाएगी और धीरे धीरे ही वापिस आ जाएगी। संसार आपकी रौशनी से कभी वंचित नहीं रहेगाउन्होंने श्राप को पूरी तरह वापिस इसीलिए नहीं लिया ताकि उन्हें अपनी गलती याद रहें।

इसीलिए तबसे ऐसा माना जाता है की चतुर्थी के दिन जो भी व्यक्ति इस दिन चन्द्र के दर्शन करता है, उस पर झूठा आरोप लगता है।

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