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गणेश चतुर्थी विशेष: जानिए गणेश चतुर्थी पूजन विधि, शुभ समय और गणेश-स्थापना का सही तरीका..!

गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे भारत में बहुत ही धूम धाम और जोरों शोरों से मनाया जाता है। इस दिन सभी भक्त गणेश जी की प्रतिमा को अपने घर लाते है और गणेश चतुर्थी के पर्व के पहले दिन से लेकर दसवें दिन तक अपने घर में स्थापित करते हैं। जिस दिन गणेश जी को लाया जाता है, उस दिन को गणेश चतुर्थी कहा जाता है और दसवें दिन जब उन्हें विसर्जित किया जाता है तो उसे अनंत चतुर्दशी कहते हैं। इस साल गणेश चतुर्थी 10 दिन नहीं बल्कि 11 दिनों के लिए है, अतः इस साल 11 दिनों तक गणेशोत्सव मनाया जाएगा।

गणेश मूर्ती स्थापना:

  • गणपित मूर्ति की पूजा करने के लिए सबसे पहले एक आरती की थाली में अगरबती-धूप, पान के पते और सुपारी को रखें। साथ-साथ गणेश मंत्र “ऊं गं गणपतयेनम:” का जाप करें।

  • अगर गणेश जी की मूर्ति को गणेश चतुर्थी से पहले घर ला रहे हैं तो उसे कपडे से ढककर लाये और पूजा के दिन मूर्ति स्थापना के समय ही इसे हटाए।

  • घर में मूर्ति प्रवेश से पहले इस पर अक्षत डाले। स्थापना के समय भी अक्षत को आसन के निकट डाले।

 

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गणेश पूजा का विधि विधान:

  • जब तक भगवान गणेश घर में रहे, तब तक धयन रखें की घर का कोई भी सदस्य उनके साथ रहे।

  • घर में गणेश स्थापित करने और पूजन का शुभ समय सुबह 11:06 मिनट से लेकर दोपहर 13:30 मिनट तक है।

  • आवशयक सामग्री जैसे चौकी, पंचामृत, जल-कलश, लाल कपड़ा, रोली, मिष्ठान जैसे मोदक, गंगाजल, इलायची, नारियल, सिंदूर, पंचमेवा घी, कपूर को रख लें।

  • गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर नहा लें।

  • स्नान के बाद पूजा करने की तैयारी करें। ध्यान रखें की पूजा करते हुए आपक मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर हो।

  • पूजा करते समय सबसे पहले पंचामृत और फिर गंगा जल से गणेश जी का स्नान करवाएं। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा को वहां स्थापित करें और ऋद्धि-सिद्धि के रूप में उनके साथ दो सुपारी रखें।

  • गणेश जी को सिंदूर और वर्क लगाएं।

  • उन्हें लाल चंदन का टीका और अक्षत यानि चावल लगाएं। इसके बाद उन्हें मौली और लाल पुष्प अर्पित करें।

  • इसके बाद उन्हें बारियल, दूर्वा, मोदक, पंचमेवा, लौंग इलायची अर्पित करें।

  • धूप, अगरबत्ती और दीपक से उनकी आरती करें।

  • “वक्रतुंड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरु मे दे सर्व कार्येषु सर्वदा” मंत्र का जाप करें और गणेश आरती से उनकी आराधना करें।

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    बैद्यनाथ धाम ज्योतिर्लिंग :

    बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर को ही बाबा बैद्यनाथ धाम भी कहा जाता है।इस जगह को शिव के सबसे पवित्र निवास स्थान और 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। यह भारत के झारखंड राज्य के देवघर में स्थित है। इस मंदिर परिसर है बाबा बैद्यनाथ का ज्योतिर्लिंग स्थापित है।मंदिर परिसर में बैद्यनाथ धाम ज्योतिर्लिंग के अलावा 21 अन्य मंदिर भी हैं।

    पूजा का महत्त्व:

    भगवान शिव के पूजा में बेलपत्र चढ़ाना सर्वश्रेठ और शुभ माना गया है। तीन पत्तियों का संगम, शिव की तीन आंखों के अलावा उनके त्रिशूल का भी प्रतीक है, जो पिछले तीन जन्मों के पापों को नष्ट करने के वाला माना जाता है। हालाँकि, वृक्ष के बेलपत्र तोड़ने का भी एक समय होता हैं। कहा जाता हैं कि महादेव सौ कमल चढ़ाने से जितने प्रसन्न होते हैं, उतना ही एक नीलकमल चढ़ाने पर होते हैं और एक हजार नीलकमल के बराबर एक बेलपत्र होता है। इसीलिए भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए बेलपत्र चढ़ाना चाहिए।

    पूजा कैसे होगी?

    हमारे द्वारा नियुक्त पुजारी बैद्यनाथ धाम मंदिर में बेलपत्र द्वारा स्थापित विधी से पूजा सम्पन्न करते है।

    पूजा सामग्री:

    बेलपत्र, जल, फूल।

    पूजा अवधि:

    नित्य, 10 मिनट

    पूजा करने वाले पंडितों की संख्या:
    • पंडित मोती राम मिश्रा 35 वर्षों के अनुभव के साथ।

    • पंडित ललन मिश्रा 10 वर्षों के अनुभव के साथ।

    डिसक्लेमर : हम किसी भी मंदिर के एजेंट, सहयोगी या प्रतिनिधि नहीं हैं। हम पूरे देश में फैले पंडितों के अपने नेटवर्क के माध्यम से सेवाएं प्रदान करवाते हैं

    इस पूजा को बुकिंग के 7 दिनों के अंदर शुरु करवाया जाएगा।

    About the Temple :

    Baidyanath Jyotirlinga temple, also known as Baba Baidyanath dham and Baidyanath dham is one of the twelve Jyotirlingas, the most sacred abodes of Shiva. It is located in Deoghar in the Santhal Parganas division of the state of Jharkhand, India. It is a temple complex consisting of the main temple of Baba Baidyanath, where the Jyotirlinga is installed, and 21 other temples.

    About the Puja:

    Offering Bilva or belpatra in Shiva Puja is important and considered auspicious. A confluence of three leaves, "Bilva" is symbolic of Shiva's three eyes as well as his trident (trishul) which is believed to destroy sins of the past three births. However, there are certain days when one should not pluck the bel leaves from a tree.

    How Puja is done ?

    The purohits and pandits will perform the puja with proper rituals and right procedure inside Baba Baidyanath Dham Temple.

    Puja Samagri:

    Belpatra, Jal, Flowers.

    Puja Duration:

    10 mins, Everday

    Number of Pandits performing Puja:
    • Pandit Moti Ram Mishra with 35 years of experience.

    • Pandit Lallan Mishra with 10 years of experience.

    Disclaimer : We are not an agent, associate or representative of any temple. We perform services through our own network of Pandits spread throughout the country

    Please note it can take up to 7 days to schedule the puja.