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अष्टविनायक –गणेश जी के अद्भुत आठ धाम, जहाँ है स्वयं वास करते प्रभु!!

  • श्री मयूरेश्वर मंदिर, जहाँ प्रकट हुए थे स्वयं भगवान गणेश..!

यह मंदिर पुणे से 80 किलोमीटर दूर, मोरेगावं में स्थित है। यह मंदिर गणेश जी की पूजा का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान मानत जाता है। इस मंदिर की खास बात यह है की इसके चार द्वार है जो चारों युग जैसे सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग को दर्शाते है। इस मंदिर में शिव वाहन नंदी की मूर्ति स्थापित है। इस नंदी मूर्ति के सन्दर्भ में यह कथा प्रचलित है की एक बार यहाँ भगवान शिव और नंदी इस मंदिर क्षेत्र में विश्राम करने रुके थे। लेकिन बाद में नंदी ने यहाँ से जाने से माना कर दिया था, तभी से वह यही पर वास करने लगे। ऐसा माना जाता है की नंदी और मूषक दोनों ही इस मंदिर की रक्षा करते हैं।

एक प्रसिद्ध कथा यह भी है की भगवान गणेश ने मोर पर सवार होकर सिन्धुरासुर नामक एक राक्षस का वध किया था। इसी कारण यहाँ स्थित गणेशजी को मयूरेश्वर कहा गया।

 

  • सिद्धिविनायक मंदिर, जहाँ प्राप्त होती है हर सिद्धि..!

सिद्धिविनायक मंदिर, अष्टविनायक मंदिर में दुसरे स्थान पर आता है। यह मंदिर पुणे से करीब 200 किमी दूरी, करजत तहसील, अहमदनगर में स्थित है। यह भगवान गणेश का बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर है। मान्यता है की यहाँ पर विष्णु भगवान ने सिद्धियाँ हासिल की थी। सिद्धिविनायक मंदिर एक पहाड़ की छोटी पर बना हुआ है इसीलिए मंदिर की परिक्रमा के लिए पहाड़ी यात्रा करनी पड़ती है।

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  • श्री बल्लालेश्वर मंदिर, जहाँ हर भक्त को मिलता है गणेश-स्नेह..!

श्री बल्लालेश्वर मंदिर, अष्ट विनायक मंदिर में दूसरे तीसरे स्थान पर आता है। यह मंदिर पाली गाँव, रायगढ़ में स्थित है। इस मंदिर का नाम गणेश जी के भक्त बल्लाल के नाम पर पड़ा था। बल्लाल भगवन गणेश का परम भक्त था। एक दिन उसने एक पूजन का आयोजन किया जो की कई दिनों तक चली। पूजा में सम्मिलित काफी बच्चें कई दिनों तक पूजा में ही बैठे रहे। इस कारण उन बच्चों के माता पिता ने बल्लाल को बहुत पीटा और उसे जंगल में फेक दिया। बल्लाल ने गंभीर हालत में भी गणेश जी के मंत्रो का निरंतर जप किया जिससे गणेश जी ने प्रस्सन होकर उसे दर्शन दिए। उसने गणेश जी से प्रार्थना की वह यही निवास करें। गणेश जी ने उसके आग्रह को प्रसन्नता से स्वीकार किया।

 

  • श्री वरदविनायक, जहाँ हर इच्छा पूर्ण होने का मिलता है वरदान..!

श्री वरदविनायक मंदिर, अष्ट विनायक में चौथे गणेश हैं। यह मंदिर कोल्हापुर, रायगढ़ में स्थित है। श्री वरदविनायक मंदिर एक सुन्दर पर्वतीय गावं महाड़ में स्थापित है। यहाँ की खास मान्यता यह है की इस मंदिर में नंद्दीप नमक एक दीपक है जो कई वर्षों से प्रज्जवलित है। माना जाता है की यहाँ पर भक्ति की हर मनोकामना पूर्ण होती है। वरदविनायक का नाम लेने मात्र से ही यहाँ हर इच्छा पूरा होने का वरदान प्राप्त होता है।

 

  • चिंतामणि गणपति, जहाँ हर कष्ट और चिंता से मिलती है मुक्ति।।!

अष्टविनायक में पांचवें गणेश हैं चिंतामणि गणपति। यह मंदिर पुणे जिले के हवेली क्षेत्र, थेऊर गाँव में स्थित है। मंदिर के पास ही तीन नदियों: भीम, मुला और मुथा का अद्भुत संगम होता है। इस मंदिर की सबसे प्रसिद्ध मान्यता यह है अगर भक्त के जीवन में बहुत ही कष्ट और दुःख है, तो इस मंदिर में गणेश जी की दर्शन के उसकी सारी मुश्किल समाप्त होती है। ऐसा मन जाता है की भगवान विष्णु ने भी अपने विचलित मन को शांत करने के लिए इस स्थान पर आकर तपस्या की थी।

 

  • श्री गिरीजात्मज गणपति, जिसके दर्शन मात्र से होते है हर पाप दूर..!

श्री गिरिजात्मज यह मंदिर पुणे-नासिक राजमार्ग पर पुणे से करीब 90 किलोमीटर दूरी पर है। यह मंदिर लेण्याद्री गाँव में स्थित है। गिरजात्मज का अर्थ है गिरिजा यानी माता पार्वती के पुत्र गणेश। यह मंदिर बहुत ही सुन्दरता से एक पहाड़ और बोध गुफयों के स्थान पर बनवाया गया है। यहां लेनयादरी पहाड़ पर 18 बौद्ध गुफाएं हैं और इनमें से 8वीं गुफा में गिरजात्मज विनायक मंदिर है। इन गुफयों को गणेश गुफा भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है की यह पूरा मंदिर एक बड़े से पत्थर को काटकर बना।

 

  • विघ्नेश्वर गणपति मंदिर, जहाँ भक्तों के सारे विघ्न होते है दूर..!

विघ्नेश्वर गणपति मंदिर, अष्टविनायक में सातवें गणेश हैं। यह मंदिर पुणे के ओझर जिले में जूनर क्षेत्र में स्थित है। यह पुणे-नासिक रोड पर नारायणगावं से जूनर या ओजर होकर करीब 85 किलोमीटर दूरी पर स्थित है।

विघ्नेश्वर गणपति मंदिर के सन्दर्भ में एक बहुत ही अनोखी कथा प्रचलित है। विघनासुर नामक एक असुर था जो संतो को बहुत दुःख और कष्ट दे रहा था। भगवान गणेश ने उस असुर का वध किया और सबको मुक्ति दिलवाई। तबी से यह मंदिर विघ्नेश्वर गणपति मंदिर से जाना जाता है।

 

  • महागणपति मंदिर, जहाँ विराजमान है गणेश जी की अद्भुत प्रतिमा..!

महागणपति मंदिर, अष्टविनायक मंदिर के आठवें गणेश जी हैं। यह मंदिर पुणे के रांजणगांव में स्थित है। यह मंदिर बहुत ही विशाल और सुन्दर है। इस मंदिर में स्थापित भगवान गणपति की मूर्ति को माहोतक नाम से भी जाना जाता है। यहां की गणेशजी प्रतिमा अद्भुत है। प्रचलित मान्यता के अनुसार मंदिर की मूल मूर्ति तहखाने की छिपी हुई है। पुराने समय में जब विदेशियों ने यहां आक्रमण किया था तो उनसे मूर्ति बचाने के लिए उसे तहखाने में छिपा दिया गया था।


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