रक्षाबंधन के सन्दर्भ में महाभारत से जुड़ी अनोखी कहानी..!

रक्षाबंधन को भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन अपने भाई से रक्षा का प्रण लेती है और उसके लम्बे आयु की प्राथना करती है। इस साल रक्षाबन्ध, श्रावण मास के आखिरी सोमवार, यानि 7 अगस्त को है। चूंकि रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है इसलिये इसका महत्व बहुत अधिक हो जाता है।

यू तो रक्षाबन्ध से बहुत सारी एह्तिहासिक कथाएं सम्बंधित है, लेकिन जो सबसे जयादा रोमांचक कथा है, वह महाभारत युग से जुडी हुई है।

शिशुपाल भगवान् कृष्णा के रिश्तेदार लगते थे। जब शिशुपाल का जन्म हुआ तब उनके 3 नेत्र तथा 4 भुजाएं थीं और ये आकाशवाणी हुई थी उनकी मृत्यु का कारण वह व्यक्ति होगा जिसकी गोद में जाने पर बालक अपने नेत्र तथा दो भुजाओं का परित्याग कर देगा। एक बार कृष्णा, शिशुपाल से मिलने आये और उसे अपनी गोद में लिया। उसे गोद में लेते ही शिशुपाल की काया-पलट हुई और वह सुन्दर हो गया।

उसकी माँ अपने बेटे को स्वास्थ देखकर बहुत प्रसन्न हुई और उन्होंने श्रीकृष्ण से उसकी रक्षा की मांग की। कृष्ण ने शिशुपाल की माता को वचन दिया कि वह शिशुपाल के 100 अपमान क्षमा करेंगे अर्थात उसे सुधरने के 100 मौके देंगे। परन्तु उसके बाद उसे दण्ड देंगे।

शिशुपाल बड़े होकर एक दुष्ट और क्रूर राजा बने और एक दिन उन्होंने भरी राज्यसभा में भगवान श्री कृष्णा की बहुत निंदा की। क्रोधित होकर भगवान श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया।

शिशुपाल के वध के दौरान जब श्री कृष्णा अपने चक्र को छोड़ रहे थे, तो उनकी ऊँगली कट गई और निरंतर रक्त बहने लगा। यह देखकर वहा पर उपस्थित सभी लोग, श्री कृष्णा के घाव पर कुछ बांधने और रक्त के बहाव को रोकने के लिए कोई वस्त्र ढूँढने लगें। वहा पर मौजूद, द्रौपदी से रहा नहीं गया और उन्होंने तुरंत ही अपनी साडी़ का किनारा फाड़ कर कृष्ण की अंगुली में बांध दिया।

रक्त का बहाव रुक गया और श्रीकृष्ण ने भावुक होकर द्रौपदी को कहा – “बहन..!! इस साड़ी की मै हमेशा लाज रखूँगा।“ चूँकि उन्होंने कष्ट के समय भगवान कृष्ण की सहायता थी, इसीलिए उन्होंने द्रौपदी को एक वचन दिया की वह ताउम्र अपनी बहन की रक्षा करेंगे और हर मुश्किल के समय उनका साथ देंगे। इसी ऋण को चुकाने के लिए दु:शासन द्वारा चीरहरण करते समय कृष्ण ने द्रौपदी की लाज रखी।


Add Comments

Please note, comments must be approved before they are published