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कैसे बनाएं गुरु पूर्णिमा को खास..?

गुरु का दर्जा माता-पिता और भगवान से भी ऊपर माना गया है।  संत कबीर ने भगवान् से पहले गुरु की आराधना को जयादा महत्त्व दिया है। कहा जाता है कि आषाढ़ पूर्णिमा को आदि गुरु वेद व्यास का जन्म हुआ था। उनके सम्मान में ही आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।

आषाढ़ की पूर्णिमा में गुरु पूर्णिमा का महत्त्व:
आषाढ़ की पूर्णिमा को चुनने के पीछे अर्थ यह है कि गुरु को पूर्णिमा के चंद्रमा के समान माना जाता है जो स्वयं प्रकाशमान रहने के साथ साथ अपने शिष्यों को भी प्रकाशमान करते हैं।  शिष्यों को बादलों के समान माना गया है।  आषाढ़ में चंद्रमा बादलों से घिरा रहता है, बिलकुल वैसे ही जैसे शिष्यों से गुरु।  इसलिए आषाढ़ की पूर्णिमा का बहुत ही महत्व है।

गुरु का आशीर्वाद सबके लिए कल्याणकारी व ज्ञानवर्द्धक होता है, इसलिए इस दिन गुरु पूजन के उपरांत गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।  सिख धर्म में इस पर्व का महत्व अधिक इस कारण है क्योंकि सिख इतिहास में उनके दस गुरुओं का बेहद महत्व रहा है।

क्या करें गुरु पूर्णिमा के दिन:

  1. गुरु पूर्णिमा के दिन अपने गुरु को याद और नमन करना चाहिए. श्रधानुसार उनको उपहार में फल, वस्त्र आदि भेंट करके प्रसन्न करना चाहिए. गुरुओं के साथ-साथ अपने माता पिता, बड़े भाई-बहन और घर के बुजुर्गो का आशीर्वाद भी अवश्य प्राप्त करना चाहिए.

  2. इस दिन अपने इष्ट देव का पूरे मन से पूजन करना चाहिए.

  3. इस दिन व्यासजी, ब्रह्माजी, गुरु ब्रहस्पति, गोविन्द स्वामीजी जैसे महान गुरुओं का ध्यान करना चाहिए.

  4. इस दिन “गुरुपरंपरासिद्धयर्थं व्यासपूजां करिष्ये” मंत्र का जाप करना चाहिए।

  5. इस दिन भगवान विष्णु का पूजन बहुत ही लाभदायक माना गया हैं. इसीलिए भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने गाय के घी का दीपक जलाकर, विधिवत पूजन करना चाहिए और प्रसाद चढ़ाना चाहिए.


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