जानिए “इक ओंकार सतनाम” जैसे दोहों का सार और गुरु नानक देव जी के यह 10 अनमोल विचार:

गुरु नानक देव जी सिखों के प्रथम गुरु थे। गुरु नानक देव जी का जन्म 15 अप्रैल 1469 को हुआ था लेकिन इनका जन्मदिवस हर साल कार्त‌िक पूर्ण‌िमा को मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 4 नवंबर को मनाया जा रहा है। इस पर्व को प्रकाश का पर्व भी माना जाता है। इन्होंने समाज को आगे बढ़ने के ल‌िए प्रकाश द‌िखाने का काम क‌िया। गुरु नानक जयंती की बहुत सारी विशेष बातें हैं जो बहुत ही कम लोग जानते हैं।

आइए जानते कुछ विशेष बातें:

  • “इक ओंकार सतनाम, करता पुरखु निरभऊ।

     निरबैर, अकाल मूरति, अजूनी, सैभं गुर प्रसादि||

भगवान् एक हैं, जो सत्य हैं, जो निर्माण करता है, जो निडर हैं, जिसके मन में कोई बैर नहीं हैं, जिसकी कोई आकार नहीं हैं, जो जन्म मृत्यु के परे हैं जो स्वयं ही प्रकाशित हैं इनके नाम के जप से ही उसका आशीर्वाद मिलता है।

  • हरि बिनु तेरो को न सहाई।

     काकी मात-पिता सुत बनिता, को काहू को भाई।।!  

हरि के बिना किसी का सहारा नहीं होता। सभी काकी माता पिता पुत्र तू हैं कोई और दूसरा नहीं।।!

  • धनु धरनी अरु संपति सगरी जो मानिओ अपनाई!

     तन छूटे कुछ संग न चालै, कहा ताहि लपटाई!

धन सम्पति और जो भी हैं जिसे टीम अपना कहते हो वो सब यही छुट जाता हैं यहाँ तक तुम्हारा शरीर भी यही छुट जाता है यहाँ तक तुम्हारा शरीर भी यही छुट जाता हैं तो फिर तुम किस बात के मोह में पड़े हो।

  • दीन दयाल सदा दु:ख-भंजन, ता सिउ रूचि न बढाई।

     नानक कहत जगत सभ मिथिआ, ज्यों सुपना रैनाई॥

नानक जी कहते इस जगत मसब झठू हजो सपना तुम देख रहेहो वो तुम्हे अच्छा लगता है । दुनियाँ के संकट प्रभु की भक्ति से ही दूर होते हैं, तुम उसी में अपना ध्यान लगाओ।

  • जगत में झूठी देखी प्रीत।

      अपने ही सुखसों सब लागे, क्या दारा क्या मीत॥

इस दुनियाँ में प्रेम भी झठू हैं, सभी को अपना सुख ही प्यारा लगता हैं ।

  • मेरो मेरो सब कहत हैं, हित सों बध्यौ चीत।

      अन्तकाल संगी नहिं कोऊ, यह  अचरज की रीत।।!

इस जगत में सब वस्तुओं को, रिश्तों को मेरा हैं मेरा  हैं करते रहते हैं लेकिन मृत्यु के समय सब कुछ यही रह जाता हैं कुछ भी साथ नहीं जाता हैं। यह सत्य आश्चर्यजनक हैं पर यही हैं।

गुरु नानक देव जी के 10 अनमोल वचन:

  1. तेरी हजारों आँखें हैं और फिर भी एक आंख भी नहीं ; तेरे हज़ारों रूप हैं फिर भी एक रूप भी नहीं।

  2. धन-समृद्धि से युक्त बड़े बड़े राज्यों के राजा-महाराजों की तुलना भी उस चींटी से नहीं की जा सकती है जिसमे में ईश्वर का प्रेम भरा हो।

  3. दुनिया में किसी भी व्यक्ति को भ्रम में नहीं रहना चाहिए। बिना गुरु के कोई भी दुसरे किनारे तक नहीं जा सकता है।

  4. जिसे खुद पर भरोसा नहीं है वो भगवान पर कभी भरोसा नहीं कर सकता।

  5. जो लोग प्रेम में सराबोर रहते हैं, उन्हें भगवान मिलते हैं।

  6. आपकी सद्भावना ही मेरी सामाजिक प्रतिष्ठा है।

  7. उसके (भगवान) तेज से ही सब कुछ प्रकाशित है।

  8. धार्मिक वही है जो सभी लोगों का समान रूप से सम्मान करे।

  9. केवल वही बोलो जो आपको सम्मान दिलाएं।

  10. दुनिया सपने में रचा हुआ एक ड्रामा है।


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